क्या आपने कभी सोचा है कि साफ और धूप वाले दिन में आसमान हमेशा नीला क्यों दिखाई देता है? यह सिर्फ रंग नहीं है, बल्कि एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है जो प्रकाश और वायुमंडल के बीच interaction के कारण होती है। इस लेख में हम इसे सरल भाषा में समझेंगे ताकि आप इसका असली कारण आसानी से जान पाएं।
सूर्य की किरणें हमें सफेद प्रकाश के रूप में दिखती हैं, लेकिन असल में यह कई रंगों का मिश्रण होती हैं — लाल, नारंगी, पीला, हरा, नीला, इत्यादि। जब ये किरणें वायुमंडल में प्रवेश करती हैं तो अलग-अलग रंग अलग-अलग तरीके से बिखरते हैं।
Rayleigh Scattering एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है जिसमें प्रकाश की छोटी तरंगदैर्ध्य (जैसे नीले और बैंगनी रंग की) तरंगें वायुमंडल के छोटे-छोटे अणुओं से टकराकर चारों तरफ फैल जाती हैं। इसका नाम Lord Rayleigh नामक वैज्ञानिक के नाम पर पड़ा।
जब सूर्य की रोशनी वायुमंडल से गुजरती है, तो छोटी तरंगदैर्ध्य वाली रोशनी (नीला और बैंगनी) सबसे ज्यादा बिखरती है। हालांकि बैंगनी भी खूब बिखरती है, लेकिन हमारी आंखें नीले रंग के प्रति ज्यादा संवेदनशील होती हैं। यही कारण है कि हमें आसमान मुख्य रूप से नीला दिखाई देता है।
सूरज जब ढलता या उगता है, तो उसकी रोशनी को वायुमंडल में लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। इस दौरान नीली और बैंगनी रोशनी ज़्यादातर बिखर जाती हैं और लाल-नारंगी रंग सीधी आंख तक पहुंचते हैं, जिससे आसमान लाल-नारंगी दिखता है।
इसलिए, जब आप अगली बार दिन के समय ऊपर की ओर देखेंगे, तो समझ जाइये — वो केवल रंग नहीं है, बल्कि प्रकाश, विज्ञान और हमारी आंखों का एक सुंदर खेल है! 😊