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आंदोलन जिसने रखी आजादी की नींव

सत्याग्रह - जिसका अर्थ है सत्य के लिए आग्रह

सत्याग्रह आंदोलन बिहार के चम्पारण की धरती से महतमा गाँधी ने शुरू किया था अप्रैल 1917 में, राजकुमार शुक्ल जिनके आग्रह पर महतमा गाँधी चम्पारण गए और वही से नील की खेती के विरोध में सत्याग्रह आंदोलन शुरू किया. सत्याग्रह आंदोलन महत्मा गाँधी द्वारा भारत में किया गया पहला जन आंदोलन था.

सत्याग्रह आंदोलन भारत की आजादी के इतिहास में मील का पत्थर साबित हुआ. सत्याग्रह आंदोलन के पहले महत्मा गाँधी दक्षिण अफ्रीका में एक जाने माने वकील हुआ करते थे. कहा जाता है किआ सत्याग्रह आंदोलन के बाद से ही लोग मोहन दास करम चंद गाँधी को 'महात्मा' के नाम से जानने लगे.

राजकुमार शुक्ल ने महात्मा गाँधी को नील किसनो की दुर्दशा दिखने के लिए बिहार के चमपारण बुला लाये. किसानो की दुर्दशा देख कर गाँधी जी ने इसका विरोध करने का निर्णय लिया जो धीरे धीरे एक बड़े आंदोलन में बदल गया. इस आंदोलन में गाँधी जी के साथ बिहार के नामी चेहरे भी जुड़ गए जिनमे से राजेंद्र प्रसाद, रामनवमी प्रसाद, बाबू ब्रजकिशोर मुख्या थे.

15 अप्रैल को गाँधी जी मोतिहारी पहुंचे, मोतिहारी जो की आज पूर्वी चम्पारण जिले का मुख्यालय भी है. मोतिहारी के बारे में जायदा जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें. मोतिहारी पहुंचने के बाद गाँधी जी ने देश के दूसरे कोने से अपने पहचान के लोगो तक संदेशा पहुंचाया.

गाँधी जी ने आंदोलन की शुरुवात मोतिहारी के एक गांव जसवलपट्टी से की, क्योंकि जसवलपट्टी में एक ताजा घटना घटी थी. अंग्रेजो के कैंप में इस आंदोलन को लेकर अलग ही अफरा तफरी मची हुई थी. गाँधी जी ने नील की खेती के पीछे अंग्रेजो की दमनकारी नीतियां समझ ली थी. नील की खेती प्रकृति के खिलाफ जाकर की गयी खेती है, जिस से किसनो के खेत को भरी नुकसान होता.

महत्मा गाँधी द्वारा चलाया गया सत्याग्रह आंदोलन ने भारत ही नहीं पुरे विश्व में ख्याति प्राप्त की, इस आंदोलन ने ब्रिटिश साम्राज्य की निवे हिला कर रख दी. 1917 में जब गाँधी जी मोतिहारी पहुंचे उसके बाद उन्होंने लगभग 2900 गांव का जायजा लिया.

इस आंदोलन के फायदे

  • चम्पारण में विकास की पहल हुई
  • इसी आंदोलन के बाद मोहन दास करम चंद गाँधी 'महात्मा' के रूप में जाने जाये लगे